रविवार, 18 फ़रवरी 2018

नन्हीं नृत्यांगना अंतरा गोतम कि कुछ नृत्य मुद्राएं

**नन्हीं नृत्यांगना  गुनगुन ने मंच पर की  यादगार प्रस्तुति
प्रयाग संगीत समिति प्रेक्षागृह में आज गुनगुन अंतरा गौतम ने नृत्य की शानदार प्रस्तुति की जिसकी लोगों ने खूब सराहना की अंतराल 6 साल की है और टैगोर पब्लिक स्कूल मैं कक्षा 2 की छात्रा है अंतर 3 साल की उम्र से ही मंच पर अपनी मां के साथ अनेक प्रस्तुतियां कर रही है अंतरा के पिता भी रंगमंच और TV के जाने माने अभिनेता है।
** अजामिल
सभी चित्र अजामिल

शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2018

नाटक जितनी लव अपने अफसाने

**नाटक

मंच पर हुई प्यार की प्रस्तुति

जितने लब उतने अफसाने

     उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र इलाहाबाद के प्रेक्षागृह में वैलेंटाइन डे के अवसर पर अख्तर अली द्वारा लिखित नाटक -जितने लव उतने अफसाने - की शानदार प्रस्तुति की गई । हिंदी रंगमंच पर प्रेम को प्रस्तुत किया जाना हमेशा से बहुत संवेदनशील मसला रहा है । भरत नाट्यशास्त्र के अनुशासन में कमोबेश बंधे होने के कारण हिंदी नाटक मैं प्रेम को दिखाने मैं हमेशा सीमाएं बनाकर रंगकर्मी चलते रहे हैं लेकिन इसलिए कुछ वर्षों में इस विषय को रंगकर्मियों ने पूरे साहस के साथ प्रस्तुत करने का जोखिम उठाना शुरू कर दिया है । यह अलग बात है कि इस तरह की प्रस्तुतियों में फिल्मों और टीवी धारावाहिकों का प्रभाव  देखा जा सकता है । यह नाटक भी प्रेम सम्वेदनाओं का  कोलाज है यद्यपि इसमें  कोई ऐसी बात नहीं कही गई है  जो इसके पहले फिल्म या टीवी धारावाहिकों में  पेश न की गई हो । इस नाटक मैं  कलाकारों ने  बहुत अच्छा अभिनय किया ।  दोनों कलाकार काव्यात्मक रहे और बहकने  की तमाम गुंजाइश  के बावजूद अभिनेता और अभिनेत्री ने संतुलन बनाए रखा।  कुछ कंपोजीशन  बहुत ही अच्छी थी  । संगीत भी  यथोचित रहा  जो लगातार  प्रस्तुति के वातावरण को गति प्रदान कर रहा था । प्यार एक ऐसा विषय है जिसमें जरा सी चूक हो जाने पर यह हल्केपन का शिकार हो जाता है  ।  इस प्रस्तुति में अख्तर अली का ट्रीटमेंट इस विषय के साथ पूरी संजीदगी से भरा हुआ रहा । नतीजतन इस प्रस्तुति ने कहीं-कहीं दिल को छू भी लिया । मजेदार बात यह है क़ि प्रेम की अनुभूति के बिना कोई रचना बनती भी नहीं । प्रेम साहित्यिक रचनाओं में जीवन  का नव सृजन है । और यह सृजन इस प्रस्तुति में दिखाई देता है । पूरी टीम को बहुत बहुत बधाई ।

**रिपोर्ट  / अजामिल

बुधवार, 31 जनवरी 2018

नाटक मदारीपुर जंक्शन

××नाटक
द थर्ड बेल ने की
मदारीपुर जंक्शन
की शानदार प्रस्तुति
××सभी कलाकारों ने
कमाल कर दिया
इलाहाबाद के रंग जगत में इस समय जबकि रंग संस्थाओं द्वारा उनके घिसे-पिटे नाटकों को दोहराने का सिलसिला चल रहा है ऐसे में इलाहाबाद की बहु चर्चित संस्था द थर्ड बेल ने कथाकार बालेंदु द्विवेदी के उपन्यास मदारीपुर जंक्शन पर आधारित वरिष्ठ रंग निर्देशक आलोक नायर द्वारा रुपांतरित परिकल्पित तथा निर्देशित नाटक मदारीपुर जंक्शन की उत्तर मध्य क्षेत् सांस्कृतिक केंद्र  के मंच पर  शानदार प्रस्तुति करके  सबको एक बार फिर नाटक के केंद्रीय विचार दलित विमर्श से न सिर्फ जोड़ा बल्कि मानसिक स्तर पर दलितों के अधिकार को लेकर दर्शकों को सोचने पर विवश किया ।  यह नाटक आलोक नायर का एक ऐसा प्रयोग था जो समाज की विकृतियों और विसंगतियों को हास्य और व्यंग्य में लपेटकर नाटक के कथ्य को इस तरह रखता है कि आप अंदर से हिल जाते हैं और आज की सियासत का सच जान पाते हैं ।
यह नाटक इस अर्थ में भी एक अभिनव प्रयोग कहा जा सकता है कि इसमें सभी कलाकारों ने अपने संवाद इलाहाबाद जनपद की स्थानीय बोली और मुहावरों के लटके झटके के साथ न सिर्फ बोले बल्कि उसका आरंभ से अंत तक पूरी ईमानदारी से निर्वाह किया । यह एक मुश्किल काम था लेकिन नाटक के कलाकारों ने इसे बखूबी कर दिखाया । नाटक में मौजूद लचीलेपन के कारण नाटक में अभिनेताओं को अभिनय को खूब स्कोप मिला जिसके कारण वे अपने पात्र को गहरे तक उतर कर जी सके । दो एक कलाकारों को छोड़कर लगभग सभी कलाकारों के संवादों की अदायगी एकदम परफेक्ट थी । सचिन चंद्रा और कुछ अन्य कलाकारों ने इस नाटक को जीवंत बना दिया जिसके चलते नाटक की त्रासदी अपने मर्मस्पर्शी स्वरुप में दर्शकों के समक्ष आ सकी । आलोक नायर का यह प्रयोग हटकर इसलिए भी था क्योंकि इसमें नाटक के कंटेंट को सहज और सर्वग्राही बनाने की पूरी ईमानदार कोशिश की गई । नाटक किसी पार्टी की नारेबाजी में तब्दील नहीं हुआ यही इस नाटक की सबसे बड़ी खूबी रही किसी भी तरह का उपदेश इस प्रस्तुति में नहीं परोसा गया
  इस नाटक का संगीत प्रतिभाशाली रंग अभिनेत्री और निर्देशिका रितिका अवस्थी ने तैयार किया था जो कि कंटेंट को गति देने में पूरी तरह सहायक रहा । सेट डिजाइनिंग और बेहतर की जानी चाहिए थी । नाटक की अगली प्रस्तुतियों में इस ओर अवश्य ध्यान दिया जाएगा । ऑल इंडिया न्यू थिएटर द थर्ड बेल को इस शानदार प्रस्तुति के लिए बहुत-बहुत बधाई देता है और उम्मीद करता है कि आने वाले दिनों में हम ऐसी ही प्रासंगिक प्रस्तुतियां इस संस्था की ओर से आगे भी देखेंगे ।
** समीक्षक / अजामिल **सभी चित /्र विकास चौहान

बुधवार, 10 जनवरी 2018

नाटक हवालात की प्रस्तुति

**नाटक / बैकस्टेज  की प्रस्तुति -  हवालात  **निर्देशक / प्रवीण शेखर इलाहाबाद की सुप्रसिद्ध नाट्य संस्था बैकस्टेज ने हिंदी के चर्चित कवि पत्रकार सर्वेश्वर दयाल सक्सेना लिखित नाटक हवालात की प्रस्तुति कवि केदारनाथ अग्रवाल की कविताओं के साथ उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में की यह नाटक सर्दी और भूख से परेशान 3 तथाकथित आम आदमी और एक दरोगा के माध्यम से आज की सियासत में चल रहे् कुचक्र और यह भी बताता है कि किस तरह  की ओर इशारा करता है और यह भी बताता है कि किस तरह यथास्थिति बनाए रखने की साजिश चल रही है और विरोध के स्वर दबाए जा रहे हैं इस नाटक का कथ्य काफी जोरदार था लेकिन हल्के फुल्के मनोरंजन के लटके-झटकों के चलते यह नाटक कई स्थानों पर पुनरावृति का शिकार हो गया मनोरंजन नाटक के लिए बहुत जरूरी है लेकिन मनोरंजन के चलते अगर नाटक के कंटेंट को नुकसान पहुंचता है तो इसे उचित नहीं ठहराया जा सकता nache निर्देशक प्रवीण शेखर को अब दर्शक एक ब्रांड की तरह लेते हैं और उनकी प्रस्तुतियों से कुछ अलग ही तरह की वैचारिक उर्जा के पैदा होने की उम्मीद करते हैं जो कि गलत भी नहीं है पिछली प्रस्तुतियों की तुलना में प्रवीण शेखर की यह प्रस्तुति अपने दर्शकों के सामने कुछ नया नहीं दे पाई यद्यपि प्रवीण शेखर ने पर उसने भी कहीं कोई कोर कसर नहीं छोड़ी बस जो कुछ मंच पर घट रहा था वह टॉम एंड जेरी कार्टून जैसा था नाटक के सभी पात्रों दे अपनी भूमिका को पूरी शिद्दत के साथ जिया और वह इस कंटेंट को संभालने में अपनी ओर से जो कुछ भी कर सकते थे उन्होंने बाकायदा कर दिखाया नाटक ही कुछ कंपोजीशन बहुत अच्छी बनी जोकि प्रवीण शेखर के विशेषता भी होती है सभी कलाकारों की संवादों की अदायगी बेशक लाउड थी लेकिन इस तरह की प्रस्तुतियों के लिए यही अंदाज जरूरी भी था प्रवीण शेखर अपनी प्रस्तुतियों में प्रोफेशनल अंदाज रखते हैं इसलिए उनके लिए प्रेक्षागृह में बैठे सभी दर्शक सिर्फ दर्शक होते हैं जिसके कारण नाटक नाटक के होने से पहले वाली नाटक नौटंकी से बच जाता है और समय बर्बाद नहीं होता यह खुशी की बात है कि प्रवीण शेखर देश के तमाम हिस्सों में इलाहाबाद के रंगमंच का शानदार प्रतिनिधित्व करते हैं और इलाहाबाद की एक पहचान सुनिश्चित करते हैं इस प्रस्तुति में मंच के कई कोने अंधेरे में डूबे रहे जिसके कारण अंधेरे में मंच पर जो कुछ घटित हुआ उसे दर्शक नहीं देख पाए ऑल इंडिया न्यू़ थिएटर प्रवीण शेखर और उनकी टीम को इस प्रस्तुति के लिए बहुत-बहुत बधाई देता है और उम्मीद करता है अगली प्रस्तुति में और भी संतुलन कायम किया जाएगा ।

** समीक्षक अजामिल

** सभी चित्र विकास चौहा